सोमवार, 7 मार्च 2011

Joint Parliamentary Committees and what they achieved

Joint Parliamentary Committees and what they achieved
Business Standard / New Delhi November 17, 2010, 1:06 IST
The record shows that the outcome of Parliament’s earlier JPCs has been quite disappointing on both, establishing what had happened and in identifying and punishing those culpable
Bofors (1987)
A joint Parliamentary committee was set up into the allegation that someone in the Congress had accepted bribes to buy the Bofors ‘shoot and scoot’ guns. Rajiv Gandhi was the Prime Minister and the Opposition alleged the trail went to him. The Opposition campaign was strengthened when finance minister V P Singh joined forces with them and quit the Congress. Finally after regular disruption of Parliament, when the government finally did accept the Opposition demand for a JPC, the Opposition parties boycotted the committee on the grounds that it was packed by the Congress. The JPC report was laid in parliament but was rejected by the Opposition.
Securities and banking deals (1992)
This JPC was set up in 1992 after allegations were made that ‘big bull’ Harshad Mehta had diverted funds from public sector Maruti Udyog Limited (MUL) to his own accounts, and had been unable to square accounts, provoking a record 570-point fall in the Sensex. It was only in October 1997 that the Special Court set up to hear the securities scandal-related cases could approve prosecution on 34 charges brought by the Central Bureau of Investigation (CBI). CBI in all filed 72 sets of charges relating to criminal offences, while 600-odd civil cases proceeded alongside. Of these, so far convictions have been secured only in the case of four. In September 1999, Mehta received a four-year sentence for defrauding MUL. But the recommendations of the JPC were neither accepted in full nor implemented.
Share market scam (2001)
Ahmedabad-based cooperative bank, Madhavpura Mercantile Cooperative Bank (MMCB), faced a run on its deposits because of heavy exposure to the stock markets. MMCB had a big exposure to the stock market through Ketan Parekh. The bank, in collusion with Ketan Parekh, issued pay orders without the backing of sufficient funds. Ketan Parekh, in turn, used this money to rig up the prices of shares. This nexus went unnoticed for almost a year but was broken when MCCB failed to honour the pay orders that it had issued. A JPC was ordered, which recommended sweeping changes in stock market regulations. However, many were diluted later.

5 टिप्‍पणियां:

  1. JPC इस देश की जनता के साथ जाँच के नाम पर धोखा है,आज तक JPC ने कितनों को सजा दी है ....? देश का संसद ज्यादातर गद्दारों,लूटेरों और दलालों का महल बनकर रह गया है....संसद और सांसद इस देश में सत्य,न्याय,ईमानदारी और इंसानियत की रक्षा करने में पूरी तरह असफल रहा है......

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  2. एक जेपीसी बनी थी पेप्सी/कोका कोला और उन जैसे पेय पदार्थों में कन्टेमिनेशन के विषय में. तब सुषमा स्वराज मंत्री थी और शरद पवार इस जेपीसी के अध्यक्ष. पवार और अन्य सदस्यों ने काफी पैसा खाया गया और नतीजा कुछ नहीं निकला. आज भी अगर यह पेय टेस्ट किये जाएँ तो गड़बड़ निकलेंगे.

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  3. जे सी पी जीतनी भी बन जाएँ, उसमे तो चोर नेताओं की पहुँच ही होगी, फिर गरीब/ जनता का क्या फायदा............. कुछ येंसा होना चाहिए जिस पर जनता पैसला करे

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  4. रमेश जी, सादर अभिनन्दन! इसके लिए कोई फ़ीस नहीं.लेकिन एक बहुत बड़ी फ़ीस है आप एक प्रतिज्ञा लें कि-हर सच्चे,अच्छे और ईमानदार की हर संभव सहायता करेंगे,किसी के साथ बेईमानी व ठगी नहीं करेंगे और भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए जान की भी परवाह नहीं करेंगे...आपका-जय कुमार झा. उपयोगकर्ता जयकुमार झा ने आपको इस ब्लॉग में सहयोग देने के लिए आमंत्रित किया है: भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले सेनानी

    श्रीमान जयकुमार झा जी, आपने मुझे "भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले सेनानी" ब्लॉग में योगदानकर्ता के रूप में आमंत्रित किया है. आपका निमन्त्रण पाकर खुश हूँ. अपनी प्रतिज्ञा पर अटल रहने के कारणों से आज थोड़ी मुश्किलों में जरुर हूँ मगर अपने सिध्दातों पर आज भी अटल हूँ. मैं अपने जीवन की आखिरी साँस तक हर सच्चे, अच्छे और ईमानदार की हर संभव सहायता करूँगा,किसी के साथ बेईमानी व ठगी नहीं करूँगा और भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए जान की भी परवाह नहीं करूँगा. आपका-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

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  5. महोदया लीना मेहेंदाले जी, आप बुरा न मानियेगा. आप उपरोक्त पोस्ट "भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले सेनानी" ब्लॉग पर हिंदी में डालती तो बहुत अच्छा होता. मैं अनपढ़, ग्वार(जिसे अंग्रेजी नहीं आती)भी पढ़ लेता. अगर आपकी दोनों भाषाओँ पर अच्छी पकड़ है तो आप अपनी पोस्ट को हिंदी और अंग्रेजी में डाल दिया करें. राष्ट्र के प्रति हर व्यक्ति का पहला धर्म है अपने राष्ट्र की राष्ट्रभाषा का सम्मान करना. अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ.

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ये सिर्फ टिपण्णी नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ने वाले सेनानियों को आपका समर्थन है.....