शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

73 वर्ष के बृद्ध अन्ना हजारे हमसब के बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए 5 अप्रेल 2011 को बैठेंगे भूख हरताल पर.......और हमसब........?



हमसब जानते हैं की शर्मनाक स्तर का असंतुलित भ्रष्टाचार भ्रष्ट मंत्रियों और उसके पार्टनर उद्योगपतियों के गठजोड़ द्वारा देश व समाज को लूटने का साधन बन गया है तथा भारत सरकार इन सबकी दलाल और ऐसा इसलिए हुआ है की हमारे देश में भूख से बिलबिला कर चोरी करने वाले आम चोर और पोकेटमार को सजा देने का कानून तो है लेकिन उच्च संवेधानिक पदों पर बैठे हजारों करोड़ के चोर ,भ्रष्ट और गद्दारों की जाँच करने के लिए ना तो कोई स्वतंत्र जाँच एजेंसी है और ना की कोई सख्त कानून जिससे किसी भी भ्रष्ट मंत्री या उच्च अधिकारी को सरकार की अनुमति के बिना उनके कुकर्मों के लिए गिरफ्तार किया जा सके और आजीवन कारावास से लेकर फांसी की सजा तक दी जा सके |


आज भ्रष्ट मंत्रियों और उनके पार्टनर उद्योगपतियों के द्वारा इस देश के आम लोगों के हितों के साधन और संसाधन को इस तरह लूट लिया गया है की भ्रष्ट मंत्री और उद्योग पति 6000 करोड़ के घर में रहते हैं और हैवानों की तरह ऐय्यासी करते हैं तथा इस देश का आम बच्चा शिक्षा के लिए हर गांव में एक हाई स्कूल के लिए तरसता है तथा दो वक्त की रोटी व सर पर एक छत की जुगाड़ में जीवन मृत्यु का संघर्ष करता है...... 


बेहद शर्मनाक है की हमारे देश के भ्रष्ट मंत्री,सांसद,विधायक करोडपति हैं और हमारे देश की 40 प्रतिशत आबादी भर पेट भोजन के अभाव में सो जाती है.... बेहद दर्दनाक अवस्था है एक भारतीय नागरिक और उसके बच्चों के भविष्य की......


इन्ही सब कारणों से दुखी होकर श्री अन्ना हजारे (एक महान व इंसानियत को समर्पित  सामाजिक कार्यकर्त्ता) 5  अप्रेल 2011 से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जनता द्वारा तैयार एक सख्त जन-लोकपाल बिल और एक सख्त, बेहद इमानदार ,पारदर्शी तथा जनता के सहयोग व सुझाव से  चयन किये गए जन-लोकपाल की नियुक्ति के लिए भूख हरताल पर बैठेंगे ....ये भूख हरताल 73 वर्ष की उम्र में इन्होने भारत के भविष्य को संवारने तथा इस देश के हर बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठाना है और इसमें भाग लेने के लिए अन्ना हजारे जी ने हर भारतीय का आह्वान भी किया है |


अतः हमसब का ये नैतिक दायित्व बनता है की हमसब 5 अप्रेल 2011 से रोज इनके समर्थन में जंतर-मंतर पर जाकर पूरा दिन और रात बितायें,जिससे इस बृद्ध सेनानी को हमारा समर्थन महसूस हो ....हम ऐसा करने के लिए अपने रिश्तेदारों तथा मित्रों को भी प्रोत्साहित करें.......हम बारी-बारी से कभी स्वयं,कभी बच्चों को कभी मित्रों को कभी,रिश्तेदारों को कभी अपने आस-पड़ोस के लोगों को जंतर-मंतर पर एक दिन व एक रात गुजारने के लिए नम्र निवेदन कर सकते हैं.....
मिस्त्र का तहरीर चौक बन सकता है दिल्ली का जंतर-मंतर अगर हमसब पूरे देश से एकदिन भी अन्ना हजारे जी के समर्थन में आ जायें...


आपलोग इस ब्लॉग के कमेन्ट बॉक्स में लिखकर ये बताने का कृपा करें की आप अन्ना हजारे जी के समर्थन में कितने लोगों को किस-किस दिन भेजने की व्यवस्था कर रहें हैं और आप किस दिन खुद आयेंगे जंतर-मंतर पर  | ये आग्रह पूरे देश के लोगों से है की वो अपने मीडिया साधनों का उपयोग कर इस भूख हरताल की जानकारी हर घर तक पहुँचाने का कष्ट करें तथा लोगों को इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित करें.....इसके लिए मुझ समेत पूरा देश आपका सदा ऋणी रहेगा..... जंतर-मंतर पर 5 अप्रेल 2011 से हर हिन्दुस्तानी का पूरे परिवार तथा बच्चों के साथ हार्दिक स्वागत है |

6 टिप्‍पणियां:

  1. यह लड़ाई हम सब की है… एक "कड़क" लोकपाल बिल की सख्त आवश्यकता है… अण्णा हजारे का साथ सभी को देना चाहिये…

    अपनी रोजी-रोटी की चिन्ता के अलावा, सभी लोग यह सोचें कि "बस अब बहुत हुआ… देश को मेरी भी जरुरत है…" का भाव रखें…

    राह कठिन अवश्य है लेकिन प्रण करने से आसान होगी…

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  2. कितने गर्व की बात है की अन्ना जैसे महापुरुषों को अभी भी संघर्ष करना पड रहा है !!!!!!!!!!!!

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  3. In the first meeting itself on 26th March 2011 at New Delhi, I had offered to go on 'fast unto death' from 5th April at Jantar Mantar, and this was not and is not liked by the so-called leaders of the movement for not having such a courage by themselves. This is being vehemently displayed by ignoring my determination.

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  4. मैं दूसरों के खून से अपनी होली नहीं मनाता इस आन्दोलन के कायर नेताओं की तरह. अपनी होली के लिए अपना खून बहाता हूँ. क्या ये नेता ऐसा ही करते यदि इनके पिता इनके हित में अपनी बलि देने को प्रस्तुत होते? अन्ना जी के जीवन के मूल्य पर अपनी नेतागिरी चमकाने वाले स्वयं आत्म-बलिदान की पहल क्यों नहीं करते?

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  5. श्रीमान जी, कृपया CORRUPTION FIGHTERS का सदस्य बनने की प्रक्रिया सरल बनाये. काफी कोशिश के बाद भी इसका मैं सदस्य बनने में असमर्थ रहा हूँ. अगर हमें कामयाबी(अपने अधिकार) नहीं मिली तब न्याय अधिकारीयों के हलक से निकाल/छिन कर लें आयेंगे. हम सब मिलकर पत्रकारिता व ब्लोगिंग की दुनियां में एक नया इतिहास रचकर रहेंगे. फिर लोगों को दिखा देंगे पत्रकारिता आज भी एक जन आन्दोलन का रूप ले सकती हैं अगर ईमानदारी से पत्रकारिता की जाए.मात्र कुछ भौतिक वस्तु की चाह में कुछ पत्रकार अपने ईमान व ज़मीर गिरवी रखने में कोई संकोच नहीं करते हैं. इन्ही पत्रकारों की वजय से अनेकों घोटाले फाइलों में दबकर रह जाते हैं. मैं ऐसे कई स्थानीय समाचार पत्रों को जानता हूँ. जो पैसे लेकर सिर्फ परिचय-पत्र बनाकर रोटी चला रहे हैं. पैसों की हवस में अपराधियों को परिचय-पत्र जारी करने में संकोच नहीं करते हैं. एक जीव,जानवर(कुत्ता) भी अपने लिए जी लेता हैं. हम तो फिर इंसान है. एक नेक दिल इंसान का पहला फर्ज है कि-अपना जीवन को देश के प्रति समर्पित करें.मैंने followers के माध्यम से कोशिश की थी.

    श्रीमान जी, मैं CORRUPTION FIGHTERS का सदस्य बनना चाहता हूँ. किसी प्रकार की कोई फ़ीस हो तो बता देना. फ़िलहाल आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. वैसे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने कभी आजादी के लड़ाई में शामिल होने के लिए युवा और देशवासियों से फ़ीस(रूपये) नहीं मांगी थी. हाँ,भ्रष्टाचार की लड़ाई में जान हाजिर है.मैंने followers के माध्यम से कोशिश की थी.

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ये सिर्फ टिपण्णी नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाप लड़ने वाले सेनानियों को आपका समर्थन है.....